"सौगंध मुझे इस मिट्टी की,मै देश नहीं मिटने दूंगा"
प्रधानमंत्री का राजस्थान में दिया गया भावनात्मक भाषण...।
उम्मीद है ये देश आगे बढ़े,तरक्की करे।लेकिन सिर्फ कविताओं, भाषण में नहीं...हकीकत में,जमीनी स्तर पर...।
दिखावे से ऊपर उठकर हकीकत को स्वीकार करना होगा...तभी सच्चे अर्थों में हम आत्मनिर्भर कहे जाएंगे....।
जब जब हमने अपनी वैदिक परंपराओं और ज्ञान की उपेक्षा करके पश्चिम का अंधा अनुकरण किए है।तब तब हम लुटे, पिटे और बर्बाद हुए हैं।विश्व में भारत को विश्वगुरु का दर्जा मिला,शून्य भारत की देन है,योग भारत ने विश्व को सिखाया...अगर,आज से भी हम अपने महत्त्व को समझे...वो दिन दूर नहीं जब भारत,विश्व का महान देश होगा...।
हमने अपनी संस्कृति,वेद,पुराण को कोई तव्वजो नहीं दिया।उसका फायदा दूसरे देशों ने उठाया....।
रोचक बात...जो झकझोर कर रख दे...।
रोचक बात...जो झकझोर कर रख दे...।
आंध्र प्रदेश के महान वैदिक ज्ञाता ब्रह्मश्री दंडिभातला विश्वनाथ शास्त्री को हिल्टर ने अपने यहां बुलाया। उसने,इनसे संस्कृत के वेदों को अंग्रेज़ी में अनुवाद करने के लिए कहा।तत्पश्चात यजुर और अथर्व वेद के सहायता से मिसाइल को बनाया।आप सोच सकते है,हमारे पास सब कुछ है,सिर्फ बना बनाया के चक्कर में,विदेशों से आयात करते हैं।हम आर्थिक रूप से नहीं,बल्कि हर पयमाने से आत्मनिर्भर बनना है।महात्मा गांधी ने कहा था,भले ही अंग्रेज़ी हुकूमत चलीं जाए। अगर,हम अपने संसाधन पर खड़े नहीं होंगे,तो हम भौगोलिक रूप में स्वतंत्र होने के बावजूद,आर्थिक रूप से हमारा सब कुछ उनके हाथो में है।
गांधी जी के ग्राम स्वराज का ही एक मॉडल है,जो भारत की आम जनता को सुख,स्वास्थ्य,समृद्धि और सुरक्षा प्रदान कर सकता है।आजादी के बाद न तो पंडित नेहरू ने इस पर विचार किया,न उनके आने वाले प्रधानमंत्री ने ध्यान दिया।आज़ाद भारत का राजतंत्र,पश्चिम की चकाचौंध के पीछे दौड़ दौड़ कर विदेश जाता रहा और देश बहुराष्ट्रीय कंपनियों, लुटेरों के हाथ लुटता रहा।
आज एक बार फिर से आस जगी है,देश को स्वदेशी अपनाने की,कहीं ऐसा न हो ये सिर्फ हवाबाजी बन कर रह जाए जरूरत है सभी को आगे आकर इसमें सहयोग देने की। आत्मनिर्भर भारत की इमारत में एक ईट जोड़ने की...। स्वतंत्रता दिलाने के लिए भी,विदेशी सामानों का लोगो ने बहिष्कार किया था।आज भी करना है,लेकिन स्वदेशी अपनाते हुए।
कहने और करने में अंतर न रहे,इसके लिए जिस अर्थव्यवस्था से विश्व स्तर पर देश को बढ़ाने की मांग चल रही है।ये मील का पत्थर साबित जैसा लगता है।कहां महामरी से कराह रहा देश,अभी खड़ा होने की स्तिथि में नहीं है।लोग इसे दौड़ने में लगे है।नीति सही है,समय नहीं सही है।संसाधन है,प्रबंधन नहीं सही है।
जरूरत है वर्तमान के हालात को देखते हुए,आगे का रोड मैप तैयार करने का।लोकतंत्र के बुनियादी बातों को बचाए रखते हुए...देश चले...।
लोकतंत्र जनता का,जनता के लिए,और जनता के द्वारा शासन - प्रामाणिक मनी जाती है।
अब्राहिम लिंकन
सोचिए,समझिए...।
अब्राहिम लिंकन
सोचिए,समझिए...।



Yes, this is not right time for development but we need to vocal for local.boycott foreign goods
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