"उन्नति करने के आसार है।वाणी में कठोरता का प्रभाव।जीवन सुखमय होगा।आत्मविश्वास भरपूर रहेगा।"...यही लिखा होता है न अखबार के राशि कॉलम में...।
सोचियो उनका क्या भविष्य है,जो हजारों किलोमीटर लंबी सड़को को अपनी नन्ही से कदमों से नाप दे रहे हैं।उनकी तो लकीरें ही मिट जाती होंगी,बच्चे को ट्रॉली पर रख कर खींचते हुए...।
एक तरफ लाखों करोड़ का पैकेज,दूसरी तरफ हमारे आत्मनिर्भर भारत का भविष्य...चिलचिलाती धूप में अपने गंतव्य तक पहुंचने की होड़ में...।
खैर अब शुरुआत हुआ है तो अंत भी होगा...।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार तीसरी बार प्रेस कांफ्रेंस कर,विभिन्न क्षेत्रों को मिलने वाले पैसों का ब्योरा दे रही हैं।लेकिन उन्होंने कभी ऐसे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये हिसाब नहीं दिया कि जो पैसे अबतक भेजे गए,उनका सही इस्तेमाल हुआ या नहीं?
व्यापार जगत,किसान,मजदूर,गरीब,बेसहारा,बिजली विभाग,मछली पालन,कंस्ट्रक्शन विभाग,जैसे मुद्दों पर रुपयों को बाटने का सराहनीय कार्य किया।लेकिन जिन मध्यम वर्ग के लोग,जिनकी नौकरी चली गई,जिनके पास बच्चों की फीस,घर की मूलभूत जरूरत,घर, कार की ईएमआई भरनी होगी,उनका क्या होगा...।क्या वे बेरोजगार हो गए?जो कल तक देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगे थे,क्या उनका जीवन इसी तनाव और कर्ज को चुकाते- चुकाते समाप्त हो जाएगा?
अपने तीसरे कॉन्फ्रेंस में पशुपालन कृषि,प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना,किसानों को उनके अनाज का उचित मूल्य मिले जैसे अनेक प्रावधान किए गए है।जहां दूध की खपत लगभग 560 लाख लीटर प्रतिदिन हुआ करती थी,वो 20-25 प्रतिशत घट कर 360 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है।उनके नुकसान को राहत में बदलने के लिए 5000 करोड़ दिया जाएगा जिससे लगभग 2 करोड़ किसानों के लाभान्वित होने की संभावना है।
हमारे देश के अन्न प्रदाता को फार्म गेट आधारिक संरचना के तहत 1 लाख करोड़ देने का प्रावधान किया गया है। एमएफई यानी कि माइक्रो फूड एंटरप्राइज के तहत जिसमें की उत्तर प्रदेश के आम,कश्मीर का केशर,पूर्विउत्तर की बांस को 10 हजार करोड़ दिया जाएगा।मत्स्य पालन के अन्तर्गत 20 हजार करोड़ दिया जाएगा,जिससे करीब 55 लाख लोगों के लाभान्वित होने के आसार हैं।
किसानों की एक और परेशानी का कागज़ी तौर पर हल किया गया है।उनके कच्चे समान जैसे कि टमाटर,प्याज पर 50 फीसद की सब्सिडी दी जाएगी।इसके लिए 500 करोड़ की राशि को मंजूरी दी गई है।
सरकार ने इस पर भी जोर दिया है कि किसानों को उनके अनाज हो या फल हो या सब्जी सब पर वास्तविक राशि मिले। ऐसे भी प्रावधान किए गए है,जिससे उनके मेहनत के उपज को कम मूल्य में ने आंका जाए।
कुछ हो न हो लेकिन सरकार कागज़ी कारवाही में सक्षम है।जमीनी स्तर पर हालत कुछ हैं,और हो कुछ रहा है।बड़ा सवाल ये भी कि क्या जो बजट वित्तमंत्री ने फरवरी माह में पेश की थी, ये उसके अतिरिक्त है या वहीं सिर्फ उसके नाम में रूपांतरण कर दिया गया?
आकंडे वित्त मंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस से लिए गए।
आकंडे वित्त मंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस से लिए गए।
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