बिहार के नाम सुनते सब लोगन के भोजपुरी याद आए लगल लाजमी हवेे...तनिका पढ़ी का हाल बा बिहार में बहार आई या फिनो जनता होई बेहाल...
बिहार में राजनीति दिन ब दिन नया रूप ले रही।लालू यादव की पार्टी आरजेडी अब तेजस्वी के हाथ है।वहीं जेडीयू और बीजेपी मिलकर फिर गद्दी संभालने और बहुमत से सरकार बनाने का दावा ठोक रही है।दूसरी तरफ केद्र सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व रामविलास पासवान के लड़के और लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान भी सीटों के बटवारे में फंसते नजर आ रहे। ओवैसी की पार्टी भी सहयोगी दलों के साथ अपने उम्मीदवार उतारकर चुनाव को नयी दिशा दे रहे।प्रधानमंत्री मोदी भी पिछले एक महीने से बिहार को सौगात पर सौगात दिए जा रहे, मानो सारा पीएम केयर फंड का पिटारा बिहार चुनाव को दिया का रहा।हरदीप सिंह पुरी भी बिहार के दरभंगा को हवाई यात्रा का प्रलोभन दे चुके हैं। लॉक डाउन के कारण शहरों से गांव लौटे लोग भी अबकी बार अपना वोट दे सकते है, जिससे बिहार चुनाव में कड़ी और बड़ी लड़ाई देखने को मिल सकती है।एनडीए के नेतृत्व की नीतीश सरकार के लिए ये भी पलडा भारी है कि वो सिर्फ बिहार में काम का दावा करने के साथ साथ देश में मोदी के नेतृत्व के सफलता को भी जनता के सामने पेश करते हैं चाहे वो धारा 370 हो या ट्रिपल तलाक़।ये तो आगामी महीने में ही पता चलेगा कि किसका पलडा भारी है।क्या बिहार चुनाव में नीतीश के काम पर वोट पड़ेंगे या फिर मोदी के भी काम पर वोट मिल सकते हैं?किसान बिल का भी विरोध प्रदर्शन तेज है ऐसे में इसके भी असर पड़ने की संभावना है।क्या बिहार में लौटेगी बहारे या फिर जनता होगी बेहाल?

