लगता है प्रकृति एक एक करके बदला ले रही है...
खैर लेना भी चाहिए,और भई ले भी क्यो न...।
जब हमें धूप लगे तो,पेड़ छाव देते,प्यास लगे तो नदियां पानी दे।लेकिन हम उन्हें बदले में काट दे,नदियों में रहने वाले जीव जंतुओं को प्रदूषित कर मार दे।
न्यूटन ने सही कहा है:हर कार्य के बराबर मात्रा में प्रतिक्रिया होती है।अर्थात जितना बुरा हमने किया उतना ही बुरा होना भी चाहिए।स्वार्थ की भावना में निहित होकर,खुद के सुखों में मदमस्त मनुष्यो को क्या पता,और भी लोगों का है पर्यावरण...सिर्फ हमारा हक नहीं।
आज जब स्तिथि इस मोड़ पर लाकर खड़ा की है तो,किनारा ढूंढ रहे.. कैसे बचा जाए।इस बात का घमंड और अहंकार की...जो हूं मै हूं,आर्थिक रूप से या भौगोलिक सब डगमगाने लगा है।यकीन मानना पड़ेगा प्रकृति के सामने सब बराबर हैं।कितने भी राजनीति कर लो,उसके सामने किसी की एक नहीं चलने वाली।
हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया कि वैश्विक महामारी कोरोना को बनाया गया है या फिर प्राकृतिक है।62 से भी अधिक देशों ने इसपर आपसी सहमति जताई है।जिससे कि चीन के खिलाफ जांच प्रक्रिया की जाए।इतने बड़े विनाश,हर तरफ त्राहि माम ही दिख रहा है।गरीब बेघर हो गए,विद्यार्थी का भविष्य खतरे में,व्यापारियों का व्यापार डूब गया।ऐसा लगता है सबको साढ़े नौ से शुरू करना होगा।
एक तरफ वैश्विक महामारी का प्रकोप तो दूसरी तरफ भारत के बंगाल और ओडिशा राज्यो में महा तबाही का मंजर।देश की हालत को और भी खस्ता कर दिया है। अंफ़न चक्रवात के पुर्नुमान के बावजूद भारी जान माल के नुकसान का अनुमान है।बताया जा रहा कि दमदम हवाई अड्डा पानी से लबा लब भर गया है।एयर इंडिया का ऑफिस पानी में तब्दील हो गया है। सैकड़ों वर्षों के पेड़,अस्तित्व विहीन हो गए है।
सड़को पर समंदर,चक्रवात ने जीवन को बर्बाद करके रख दिया।बच्चे से लेकर बूढ़े तक,किस प्रकार से जीवन के इस कठिन पल को काट रहे होंगे।सोचेंगे तो रूह काप जाएगी।सोचिए वो मंजर जहां झोपड़िया में पानी घुस आया हो,भोजन सामग्री सड़ गए हो,जिधर देखो पानी ही पानी नजर आए।....दर्दनाक...।
प्रधानमंत्री ने हवाई दौरा किया और जायजा भी लेने का प्रयास किए।हालांकि ऊपर से देखने और नीचे से कार्य करने में उतना ही अंतर है जितना कि जमीन और आसमान का।बताया जा रहा कि लगभग 80 लोगो के मौत की ख़बर है।राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति ने मौके पर राहत कार्य शुरू कर दिए थे।जिससे लगभग 30 लाख लोगों को सुरक्षित स्थान पर रखा गया।
प्रधानमंत्री के द्वारा तत्कालीन राहत पैकेज के तौर पर 1000 करोड़ की सहायता राशि को मंजूरी दे दी गई है।गौरतलब है कि राज्य सरकार भी केंद्र के साथ समन्वय के साथ चलेंगे,जिससे कि भारत सरकार हर संभव मदद कर पाए।राजनीति के चश्मे को उतार कर उस गरीब,बेसहारा और अपंग के नजरिए से देखें तो शायद बंगाल फिर अपने पैरो पर खड़ा हो सके।
मौके के नज़ाकत को देखते हुए,अपने आप को प्रकृति के अनुसार ही ढाले तभी हम इस आपदा से बच सकेंगे। अन्यथा जैसी करनी,वैसी भरनी का मंत्र खुद पर लागू होता रहेगा।




