सबको मालूम है मै शराबी नहीं,फिर भी कोई पिलाए तो मै क्या करू....पंकज उदास की गज़ल जरूर सुने...।
कोरोना ने समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था को बेपटरी कर दिया है।भारत की बात करे तो,स्तिथि लॉक डाउन के पहले भी बेहतर नहीं थी।लेकिन लॉक डाउन के बाद स्तिथि और भी बुरी हो गई है।ऐसे में गृह मंत्रालय ने देश भर के जिलों को ज़ोन में बांट दिया है।जिससे की आवश्यकता अनुसार छूट दी जा सके। हालांकि शराब की दुकान को ज़ोन से बाहर रखा गया है।आबकारी विभाग ने इन दुकानों को खोलने की अनुमति दे दी है।
लगता है भारत की अर्थव्यवस्था अब शराबियो के हाथ में दे दी गई है।ठेके खुले नहीं कि लोगों की भीड़ जमा हो गई,ऐसा लग रहे हो जैसे कोरोना के वैक्सीन को वितरित किया जा रहा हो।जिन बुनियादी बातों का विशेष ध्यान रखना था,वो धरी की धरी रह गई।शारीरिक दूरी का मतलब ही लोग भूल गए थे,सिर्फ उन्हें अपने प्यास को बुझाने की ललक थी।अमृत से भी ऊपर का दर्जा है,मंदिरा का,जमीन बिक जाए,सब लूट जाए लेकिन वो बोतल तो चाहिए ही।शायद इसी का फायदा सरकार भी पुरजोर तरीके से उठा रही है।
कहा जाता है कि आंकड़े बहुत कुछ बोलते है आइए आपको बताते है कि क्या कुछ कर सकती है,शराब,मंदिरा...ये रास्ता ही लोगों को गरीब और सरकार को राजा बना देती है...एक नजर आंकड़ों पर
भारत में लगभग 32 फीसद पुरुष और 11 फीसद महिलाएं शराब का सेवन करती है।भारत पूरे विश्व में अल्कोहल खपत के मामले में तीसरे नंबर पर है।कितना गर्व होता होगा लोगों को,जहां भूंकमरी और बेरोजगारी का आंकड़ा देखेंगे तो आंखो से खून निकल जाएगा।यही है भारत,आइए और भी रोचक बातें जानते है...मेरा भारत महान।
द लैसैंट जर्नल के अनुसार पूरे विश्व में 2010 से 2017 में लगभग 70 फीसद शराब की खपत बढ़ी है। जब भारत की बात हो तो पिछले सात सालों में लगभग 38 फीसद इजाफा हुआ है।पूरे विश्व में 2010 में प्रति वर्ष 21000 मिलियन लीटर शराब पी जाती थीं,जो कि 2017 में बढ़ कर लगभग 36000 मिलियन लीटर हो गई है।
यूरोप देश के बेलारूस अल्कोहल खपत में विश्व में पहले स्थान पर है। यहां पर प्रति व्यक्ति अल्कोहल खपत 14.4 लीटर है।वहीं भारत का देखे तो प्रति व्यक्ति 6.3 लीटर है। विशेषज्ञ का मानना है कि यही स्तिथि रही तो भारत में वर्ष 2022 तक शराब में तीन गुना बढ़ोतरी होने की संभावना है।
एक आखरी आंकड़ों पर नजर डालते है और जानेंगे कि आखिर क्यो सरकार को ठेकों को खोलना पड़ा...
लगभग 40 प्रतिशत राज्य की आमदनी स्टेट जीएसटी
से होती है,जिसमें कि समान की बिक्री के अनुसार होता है लेकिन लॉक डाउन के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा।लगभग 21 प्रतिशत आमदनी पेट्रोल,डीजल से होता है,वो भी नहीं हो रहा।लगभग 13 फीसद आमदनी ठेकों से होती है और इसीलिए सरकार को इन्हें खोलना पड़ा।
दिल्ली समेत कई राज्यो ने टैक्स में वृद्धि कर दी है वो भी 10-20 प्रतिशत नहीं 70 प्रतिशत।बावजूद इसके लोगों की लंबी कतार देखने को मिल रहा है,जैसे लोग मंदिरों या हॉस्पिटल में नंबर लगाते है। उसी तरीके से बड़े ही आस्था के साथ अपने नंबर का इंतज़ार करते हैं। ये आस्था का मंदिर सरकार ने खोल कर उन लोगो के लिए राहत का कार्य किया है।टीवी पर जब भी हमारे मीडिया के लोग कवर करते है तो लोग बड़े ही उत्साह से लाइन लगे होते है और कुछ तो बड़े ही गर्व से कहते है सुबह 4 बजे से लगा हूं।
जब हम इतना जान ही गए की कितने लोग हमारे देश की इकॉनमी बढ़ाने में मदद कर रहे तो ये भी जानते है,कितने लोग शराब को एक अंतराल के बाद छोड़ देते है।लिखा होता है कि धूम्र पान सेहत के लिए हानिकारक,लेकिन कौन माने भाई ,देश तो इन सब में विश्वास नहीं करेगा,और कहेंगे जो होगा देखा जायेगा।अगर कोई शिक्षित ज्यादा बने और कहे की नहीं खाना चाहिए,इससे कैंसर हो जाएगा, तो लोगों का एक ही जवाब, एक दिन तो जाना ही है। साथ में मसाला भी लगा देंगे अगर इतना ही है तो सरकार काहे नहीं बंद कर देत फैक्ट्री...।हिन्दुस्तान है जनाब...
भूंकमरी,बेरोजगारी,कुपोषण, के मामले में ना सही देश आगे तो बढ़ रहा।बस बढ़ना चाहिए,हमारे प्यारे भारत का उत्तम भविष्य हमारे अमृत पान करने वाले लोगों के हांथो में सौंपा गया,वे ही इसके इकॉनमी को पटरी पर ला सकते है।
#पीएगा इंडिया तभी तो जीएगा इंडिया
कोरोना ने समूचे विश्व की अर्थव्यवस्था को बेपटरी कर दिया है।भारत की बात करे तो,स्तिथि लॉक डाउन के पहले भी बेहतर नहीं थी।लेकिन लॉक डाउन के बाद स्तिथि और भी बुरी हो गई है।ऐसे में गृह मंत्रालय ने देश भर के जिलों को ज़ोन में बांट दिया है।जिससे की आवश्यकता अनुसार छूट दी जा सके। हालांकि शराब की दुकान को ज़ोन से बाहर रखा गया है।आबकारी विभाग ने इन दुकानों को खोलने की अनुमति दे दी है।
लगता है भारत की अर्थव्यवस्था अब शराबियो के हाथ में दे दी गई है।ठेके खुले नहीं कि लोगों की भीड़ जमा हो गई,ऐसा लग रहे हो जैसे कोरोना के वैक्सीन को वितरित किया जा रहा हो।जिन बुनियादी बातों का विशेष ध्यान रखना था,वो धरी की धरी रह गई।शारीरिक दूरी का मतलब ही लोग भूल गए थे,सिर्फ उन्हें अपने प्यास को बुझाने की ललक थी।अमृत से भी ऊपर का दर्जा है,मंदिरा का,जमीन बिक जाए,सब लूट जाए लेकिन वो बोतल तो चाहिए ही।शायद इसी का फायदा सरकार भी पुरजोर तरीके से उठा रही है।
कहा जाता है कि आंकड़े बहुत कुछ बोलते है आइए आपको बताते है कि क्या कुछ कर सकती है,शराब,मंदिरा...ये रास्ता ही लोगों को गरीब और सरकार को राजा बना देती है...एक नजर आंकड़ों पर
भारत में लगभग 32 फीसद पुरुष और 11 फीसद महिलाएं शराब का सेवन करती है।भारत पूरे विश्व में अल्कोहल खपत के मामले में तीसरे नंबर पर है।कितना गर्व होता होगा लोगों को,जहां भूंकमरी और बेरोजगारी का आंकड़ा देखेंगे तो आंखो से खून निकल जाएगा।यही है भारत,आइए और भी रोचक बातें जानते है...मेरा भारत महान।
द लैसैंट जर्नल के अनुसार पूरे विश्व में 2010 से 2017 में लगभग 70 फीसद शराब की खपत बढ़ी है। जब भारत की बात हो तो पिछले सात सालों में लगभग 38 फीसद इजाफा हुआ है।पूरे विश्व में 2010 में प्रति वर्ष 21000 मिलियन लीटर शराब पी जाती थीं,जो कि 2017 में बढ़ कर लगभग 36000 मिलियन लीटर हो गई है।
यूरोप देश के बेलारूस अल्कोहल खपत में विश्व में पहले स्थान पर है। यहां पर प्रति व्यक्ति अल्कोहल खपत 14.4 लीटर है।वहीं भारत का देखे तो प्रति व्यक्ति 6.3 लीटर है। विशेषज्ञ का मानना है कि यही स्तिथि रही तो भारत में वर्ष 2022 तक शराब में तीन गुना बढ़ोतरी होने की संभावना है।
एक आखरी आंकड़ों पर नजर डालते है और जानेंगे कि आखिर क्यो सरकार को ठेकों को खोलना पड़ा...
लगभग 40 प्रतिशत राज्य की आमदनी स्टेट जीएसटी
से होती है,जिसमें कि समान की बिक्री के अनुसार होता है लेकिन लॉक डाउन के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा।लगभग 21 प्रतिशत आमदनी पेट्रोल,डीजल से होता है,वो भी नहीं हो रहा।लगभग 13 फीसद आमदनी ठेकों से होती है और इसीलिए सरकार को इन्हें खोलना पड़ा।
दिल्ली समेत कई राज्यो ने टैक्स में वृद्धि कर दी है वो भी 10-20 प्रतिशत नहीं 70 प्रतिशत।बावजूद इसके लोगों की लंबी कतार देखने को मिल रहा है,जैसे लोग मंदिरों या हॉस्पिटल में नंबर लगाते है। उसी तरीके से बड़े ही आस्था के साथ अपने नंबर का इंतज़ार करते हैं। ये आस्था का मंदिर सरकार ने खोल कर उन लोगो के लिए राहत का कार्य किया है।टीवी पर जब भी हमारे मीडिया के लोग कवर करते है तो लोग बड़े ही उत्साह से लाइन लगे होते है और कुछ तो बड़े ही गर्व से कहते है सुबह 4 बजे से लगा हूं।
जब हम इतना जान ही गए की कितने लोग हमारे देश की इकॉनमी बढ़ाने में मदद कर रहे तो ये भी जानते है,कितने लोग शराब को एक अंतराल के बाद छोड़ देते है।लिखा होता है कि धूम्र पान सेहत के लिए हानिकारक,लेकिन कौन माने भाई ,देश तो इन सब में विश्वास नहीं करेगा,और कहेंगे जो होगा देखा जायेगा।अगर कोई शिक्षित ज्यादा बने और कहे की नहीं खाना चाहिए,इससे कैंसर हो जाएगा, तो लोगों का एक ही जवाब, एक दिन तो जाना ही है। साथ में मसाला भी लगा देंगे अगर इतना ही है तो सरकार काहे नहीं बंद कर देत फैक्ट्री...।हिन्दुस्तान है जनाब...
भूंकमरी,बेरोजगारी,कुपोषण, के मामले में ना सही देश आगे तो बढ़ रहा।बस बढ़ना चाहिए,हमारे प्यारे भारत का उत्तम भविष्य हमारे अमृत पान करने वाले लोगों के हांथो में सौंपा गया,वे ही इसके इकॉनमी को पटरी पर ला सकते है।
#पीएगा इंडिया तभी तो जीएगा इंडिया







