जब भी मां के लिए कुछ लिखना हो तो निः शब्द हो जाता हूं,लेकिन फिर भी उस ईश्वरीय रूपी मां को पाकर धन्य हो जाता हूं।
मां को सम्मान देने के लिए पूरी दुनिया में आज मदर्स डे मनाया जा रहा है।इसे हर वर्ष मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।इसकी शुरुआत का श्रेय अमेरिकी एम. जाविंस को जाता है,जिन्होंने नौ मई को इसकी शुरुआत की। ज़ाविंस अपनी मां से बहुत ही प्रेम करती थी,उनकी मृत्यु होने के पश्चात,उन्होंने याद में मदर्स डे मनाना शुरू किया।बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति वुड्रो विल्सन ने कानूनी जामा पहनाया।
आज परिणाम स्वरूप हम सभी अपनी मां को,उनके प्यार को, पूरा विश्व अति उत्साह से मनाता है।भारत ने तो माता,पिता,और गुरु को ईश्वर से भी ऊपर का दर्जा दिया है।
हम अपने मातृ,पितृ और गुरु के ऋणों को नहीं चुका सकते।एक छोटी सी कविता आप सभी के सम्मुख पेश करते है...
जब आंख खुली तो,अम्मा की गोदी का मिला सहारा था,
उसका नन्हा सा आंचल, मुझको भूमंडल सा प्यारा था।
उसके चेहरे की झलक देख,चेहरा फूलों सा खिलता था,
उसके स्तन की एक बूंद,मुझको जीवन सा मिलता था।
मै उसका राजा बेटा था,वो आंख का तारा कहती थी,
मै बनूं का बुढ़ापे में उसका,बस एक सहारा कहती थी।
उंगली पकड़कर चलना मुझे सिखाया था,पढ़ने विद्यालय भेजा था,
सही मार्गदर्शन दिखलाया था,
मेरे सारे प्रश्नों का वो फौरन जवाब बन जाती थी,
मेरे राहों के कांटे चुन,वो खुद गुलाब बन जाती थी।
मां तो अद्वितीय है,उनका कोई मोल नहीं।


( ◜‿◝ )♡
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