रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म...
यही नारा था न,प्रधानमंत्री का देश के व्यापार जगत के लिए।जिससे कि आत्मनिर्भर भारत के पंचशील पिलर पर एक भव्य इमारत खड़ा हो सके...।
लोगों के हाथ में पैसा कैसे पहुंचे ये सोचना है...ऐसा प्रतीत हो रहा जैसे कि फरवरी माह का बजट,वित्तमंत्री जी नाम में बदलाव कर,आपातकाल आर्थिक सहायता के रूप में दे रही...।कुछ बिंदु ऐसे है जैसे कि जिन लोगों की नौकरी चली गई उनका क्या होगा?मध्यम वर्ग की झोली खाली ही है।आप एटॉमिक के क्षेत्र में,कोयला निजीकरण के क्षेत्र को अधिक महत्ता दे रहे।ऐसे कैसे चलेगा...हमारा देश...टूट गया है हर इंसान...कैसे चलेगा कोई काम...?
वित्तमंत्री ने चौथा बड़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विभिन्न क्षेत्रों के विषय में जानकारी को सांझा किया।व्यापार,किसान, मजदूर,श्रमिक,पशुपालन जैसे अनेक मुद्दों पर बजट को पेश किया।अबकी बार कोयला खदान,एटॉमिक रिसर्च,सैन्य हथियार जैसे मुद्दों को जनता के समक्ष रखा गया।
सरकार एक ऐसी रणनीति ला रही है,जिसमें कि आत्मनिर्भर भारत के अन्तर्गत सोलर और अन्य कारखानों को बढ़ावा मिल सके।इस प्रावधान में देश व विदेश के व्यापारियों को जमीन मुहैया कराया जा सके। जीआईएस सिस्टम के जरिए,5 लाख हेक्टेयर जमीन को बड़े कारखानों में तब्दील किया जाएगा।
कोयला खदान के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए गए है।इसमें अब निजीकरण की भी व्यवस्था की जाएगी।विश्व में भारत कोयला की आपूर्ति के मामले में तीसरा बड़ा देश है।बावजूद इसके,हम अपने संसाधनों का उपयोग नहीं कर पा रहे।इसके लिए नीलामी की जाएगी,जिससे की बड़े स्तर पर कोयला के कारोबार किए का सके...क्या हो रहा ये सब...?
कोयला,पर्यावरण को प्रदूषित भी करता है।इसके लिए कोयले को गैस में बदला जाएगा।इसके लिए भी कुछ हिस्सा निजीकरण किया जाएगा।ज्यादा से ज्यादा कोयला निकाला जा सके,नई तकनीक की व्यवस्था के लिए,50 हजार करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है।
मिनरल सेक्टर को भी संज्ञान में लेते हुए,वित्तमंत्री ने बताया कि पहले कोयला खदान के लिए अलग, बॉक्साइट खदान के लिए अलग मालिकाना हुआ करता था,जिससे बॉक्साइट तो मिल जाता था, लेकिन समय पर कोयला नहीं मिलने से काम नहीं हो पाता था।लेकिन अब ऐसा नहीं है,दोनों ही एक कंपनी को दिया जाएगा,जिससे सुचारू रूप से काम चलता रहे।
भारत में सैन्य हथियार बाहर से आया करते थे।लेकिन अब आत्मनिर्भर भारत के अन्तर्गत इसे भी भारत में ही बनाया जाएगा।इसके लिए सैन्य बल के फंड में कटौती कर,बनाने वाले स्वदेशी फैक्ट्री को दी जाएगी।इस संदर्भ में कोई भी निजीकरण नहीं होगा,ये पूर्ण रूप से निगमकरण ही रहेगा।डिफेंस की एफडीआई लिमिट को 49% से 74% तक कर दिया गया है।
आकंडे वित्तमंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस से लिए गए।
यही नारा था न,प्रधानमंत्री का देश के व्यापार जगत के लिए।जिससे कि आत्मनिर्भर भारत के पंचशील पिलर पर एक भव्य इमारत खड़ा हो सके...।
लोगों के हाथ में पैसा कैसे पहुंचे ये सोचना है...ऐसा प्रतीत हो रहा जैसे कि फरवरी माह का बजट,वित्तमंत्री जी नाम में बदलाव कर,आपातकाल आर्थिक सहायता के रूप में दे रही...।कुछ बिंदु ऐसे है जैसे कि जिन लोगों की नौकरी चली गई उनका क्या होगा?मध्यम वर्ग की झोली खाली ही है।आप एटॉमिक के क्षेत्र में,कोयला निजीकरण के क्षेत्र को अधिक महत्ता दे रहे।ऐसे कैसे चलेगा...हमारा देश...टूट गया है हर इंसान...कैसे चलेगा कोई काम...?
वित्तमंत्री ने चौथा बड़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विभिन्न क्षेत्रों के विषय में जानकारी को सांझा किया।व्यापार,किसान, मजदूर,श्रमिक,पशुपालन जैसे अनेक मुद्दों पर बजट को पेश किया।अबकी बार कोयला खदान,एटॉमिक रिसर्च,सैन्य हथियार जैसे मुद्दों को जनता के समक्ष रखा गया।
सरकार एक ऐसी रणनीति ला रही है,जिसमें कि आत्मनिर्भर भारत के अन्तर्गत सोलर और अन्य कारखानों को बढ़ावा मिल सके।इस प्रावधान में देश व विदेश के व्यापारियों को जमीन मुहैया कराया जा सके। जीआईएस सिस्टम के जरिए,5 लाख हेक्टेयर जमीन को बड़े कारखानों में तब्दील किया जाएगा।
कोयला खदान के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए गए है।इसमें अब निजीकरण की भी व्यवस्था की जाएगी।विश्व में भारत कोयला की आपूर्ति के मामले में तीसरा बड़ा देश है।बावजूद इसके,हम अपने संसाधनों का उपयोग नहीं कर पा रहे।इसके लिए नीलामी की जाएगी,जिससे की बड़े स्तर पर कोयला के कारोबार किए का सके...क्या हो रहा ये सब...?
कोयला,पर्यावरण को प्रदूषित भी करता है।इसके लिए कोयले को गैस में बदला जाएगा।इसके लिए भी कुछ हिस्सा निजीकरण किया जाएगा।ज्यादा से ज्यादा कोयला निकाला जा सके,नई तकनीक की व्यवस्था के लिए,50 हजार करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया है।
मिनरल सेक्टर को भी संज्ञान में लेते हुए,वित्तमंत्री ने बताया कि पहले कोयला खदान के लिए अलग, बॉक्साइट खदान के लिए अलग मालिकाना हुआ करता था,जिससे बॉक्साइट तो मिल जाता था, लेकिन समय पर कोयला नहीं मिलने से काम नहीं हो पाता था।लेकिन अब ऐसा नहीं है,दोनों ही एक कंपनी को दिया जाएगा,जिससे सुचारू रूप से काम चलता रहे।
भारत में सैन्य हथियार बाहर से आया करते थे।लेकिन अब आत्मनिर्भर भारत के अन्तर्गत इसे भी भारत में ही बनाया जाएगा।इसके लिए सैन्य बल के फंड में कटौती कर,बनाने वाले स्वदेशी फैक्ट्री को दी जाएगी।इस संदर्भ में कोई भी निजीकरण नहीं होगा,ये पूर्ण रूप से निगमकरण ही रहेगा।डिफेंस की एफडीआई लिमिट को 49% से 74% तक कर दिया गया है।
आकंडे वित्तमंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस से लिए गए।





