गरीब के सब्र का बांध टूटता नज़र आ रहा...सरकार जोड़ती सी दिख रही है...।
बस एक ही दुआ है,रुपयों को भ्रष्टाचार और राजनीति की चादर से न ढक दिया जाए...और चादर हटे तो जादू की तरह पैसा गायब...सब सिर्फ कयास लगाए बैठे न रह जाए।मोदी जी अब भेजेंगे अब भेजेंगे...।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का दूसरा बड़ा प्रेस कॉन्फ्रेंस।इस बार किसान, गरीब,वंचितों,बेसहारा के संदर्भ में बजट को सांझा किया।उन्होंने प्रधानमंत्री के वक्तव्य का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार गरीब, वंचित और किसान की सरकार है।ये तो हम सभी जानते है कितनी...?
वित्तमंत्री ने स्पष्ट किया कि राशन कार्ड धारक हो या बिना कार्ड के लोग सभी को पांच किलो गेहूं या चावल, एक किलो दाल और एक किलो चना देने का प्रावधान किया गया है।किसान क्रेडिट कार्ड में मछली पालन और पशुपालन को भी ऋण लेने का प्रावधान किया गया है।पच्चीस लाख और कार्ड वितरित किए जाएंगे जिसमें की पच्चीस हजार करोड़ की ऋण को मंजूरी दी गई है।
सरकार ने राज्यों से कहा है कि आपदा प्रबंधन सहायता कोष के राशि को उपयोग करने के लिए कहा है।केंद्र सरकार ने ग्यारह हजार दो करोड़ की राशि का प्रावधान किया है,जिसमें की प्रवासी मजदूर को तीन समय का भोजन कराया जा सके,ये जिम्मेदारी राज्य सरकार की है।
एक देश,एक निशान ( कश्मीर के संदर्भ में) के बाद नया प्रावधान एक देश एक राशन कार्ड को मान्यता दी जाएगी।जिससे की देश के किसी भी कोने में व्यक्ति अपने मूलभूत भोजन सामग्री को प्राप्त कर सके।
बताया जा रहा कि 23 राज्य के 83 प्रतिशत लोग लगभग 67 करोड़ को सीधे सीधे फायदा होने वाला है।ये मै नहीं वित्त मंत्री ने कहा है।बाकी तो सभी जानते है क्या होने वाला है...?
गरीब मजदूर और शहरी गरीब के लिए भी घर के लिए विचार किया गया है।प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ साथ उन लोगो को भी घर मिलेंगे,जो शहर में कमाने के लिए जाते है, जिसका न्यूनतम रेंट तय किया जाएगा।इसमें सरकारी जमीन और कंपनी के जमीन पर इंसेंटिव के माध्यम से ये सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सूक्ष्म,मझले,और माध्यम उद्योगों का 3 लाख करोड़ दिया गया है।वहीं आज रेडी और पटरियों पर दुकान लगाने वाले लोगों के लिए भी 10 हजार रुपए देने का प्रावधान किया गया है,जो कि पूरे 5 हजार करोड़ को वितरित किया जाएगा।जिससे लगभग पचास लाख लोगों को लाभान्वित होने के आसार है।
किसान के फैसलों को देखते हुए निर्णय लिए गए है।नाबार्ड और कोऑपरेटिव बैंक जिसमे प्रति वर्ष लगभग 90 हजार करोड़ दिया जाता है।लेकिन इसमें केंद्र सरकार ने 30 हजार करोड़ और देने के लिए कहा है।जिससे की रबी की फसल और खरीफ की फसल पर कोई आंच न आने पाए।
आकंडे वित्त मंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस से लिए गए है।








