नमस्कार,मेरे प्यारे देशवासियों...।
वैसे तो हमारा देश एक दूसरे के सहारे से चलता है।यहां तक की दूसरे पार्टी के नेता को जीतने पर खरीद लिया जाता है,और सरकार बना ली जाती है। लेकिन अब प्रधानमंत्री जी ने कहा है तो आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर होना होगा।
देखिए...कितने दिनों तक हमारे बुद्धजीवी चैनलों पर कुछ महाज्ञानियो को बुला कर,एक आकर्षक हेडलाइन लिख कर, जनता को भ्रमण कराते हैं।
ये एकदम वैसे ही होता है जैसे आप मोबाइल के छह इंच में,इतने मगन हो जाते है और घड़ी की सुई अपना एंगल बदल देती, हमें पता भी नहीं चलता।ऐसा ही होता है,शायद ये हमारा दुर्भाग्य है।
प्रधानमंत्री का देश के नाम संबोधन को कुछ लोग इस लिए देखते है जिससे कोई गलती पकड़ कर,उनकी तौहीनी की जाए।कुछ लोग इसलिए देखते है,जिससे किसी सहयोगी,रिश्तेदार का फोन आए तो झेपना न पड़े।बल्कि हो सके तो अगर दो बातें वो बोले तो चार हम...भाई क्यो पीछे हटे हमने भी पूरे आधे घण्टे दिए है सुनने के लिए।
श्री मोदी ने कहा कि भारत के लोग बखूबी जानते है किस तरीके से आपदा को अवसर में बदला जाए।यही कारण है, महामारी को भारत में आने से पहले एक भी पीपीई किट और एन -95 मास्क नहीं बनता था,जो आज प्रतिदिन दो लाख से अधिक का उत्पाद कर रहा है। लोग कहते थे अपना टाइम आएगा लेकिन किसे पता था अब अपना टाइम नहीं,बल्कि भारत का टाइम आएगा...।इक्कीसवीं सदी भारत की सदी है,और इसके लिए भारत तैयार है,यही कुछ लोग कह गए हैं।
हमें ये जंग लड़ना भी है,और आगे बढ़ना भी है।ये तभी होगा जब हम सभी आत्मनिर्भरता पर जोर देंगे।
अपने लोकल के बने हुए समान को वोकल के माध्यम से ग्लोबल लेवल पर उपलब्धि दिलाना होगा।इसके लिए रिजर्व बैंक और आर्थिक सहायता राशि को जोड़कर बीस लाख करोड़ की सहायता का ऐलान किया गया है। जिससे की छोटे,मझले और व्यापक स्तर के व्यवसाय को चलाया और बढ़ाया जा सके।
इस सबके बावजूद मास्क,शारीरिक दूरी का बुनियादी तौर पर विशेष ध्यान देना है।याद रहे,ये जंग हथियारों से नहीं बल्कि हिम्मत और सावधानी से जीतना है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री फंड में आए रुपयों की जानकारी सार्वजनिक की जिसमें उन्होंने बताया कि ये लगभग सत्तावन करोड़ है।अब लोगों के मन में ये भी सवाल है प्रधानमंत्री सहायता कोष में कितने रुपए आए है।उम्मीद है जल्द ही पता चल जाना चाहिए...।
स्तिथि को सामान्य करने के लिए कैसे कैसे हथकंडे अपनाए जा रहे है,जिससे अर्थव्यवस्था कि गाड़ी फिर से पटरी पर दौड़ सके।देखिए क्या होता है,उम्मीदों को जगाया गया है,थकना मना है,जंग भी जीतनी है,दृश्य और अदृश्य दोनों ही दुश्मनों से लोहा भी लेना है।
संस्कार,संस्कृति, और शांति यही है भारत।गौर से देखेंगे तो जानेंगे भारत न सिर्फ देश है बल्कि एक विश्वास है,जहां से गौतम बुद्ध ने पूरे विश्व को ज्ञानरुपी दीपक से प्रकाशवान किया।आस्था,विश्वास और उमंग का स्वदेश...है भारत...मेरा भारत महान।








बहुत ही सुंदर लेख...
ReplyDeleteजंग हथियारों से नहीं बल्कि हिम्मत से जितनी हैं..👌
Keep it up,go ahead.god bless you
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