सूरज न बदला, चांद न बदला, न बदला आसमान...
कितना बदल गया इंसान...।
अब जब इंसान बदल ही गया है तो उसकी जरुरते, सोच और काम करने का तरीका भी बदल गया होगा।जरूरत है उसी अनुसार संविधान और राजनैतिक प्रतिनिधि को चुनने का भी पैमाना बदला जाए...।
कवि प्रदीप के द्वारा लिखा गया भावनात्मक संगीत...आज भी प्रासंगिक है।
भारत का संविधान, एक गरीब, वंचित, अशिक्षित को भी चुनाव लड़ने और राज करने की ताकत देता है।ये हमारे संविधान की विशेषता है।लेकिन जिस समय संविधान लिखा गया, उस समय माहौल और परिस्थितियां अलग थी।आज, जिस तरीके से भारत संयुक्त राष्ट्र में संशोधन करने की बात को बढ़ावा दे रहा। उसी प्रकार भारत को भी अपने संविधान में संशोधन करने की आवश्यकता है।जब अगड्ड रुपयों वाले, बड़े व्यापारी, हत्या करने या कराने वाले, अशिक्षित प्रतिनिधि ही चुनकर संसद में बैठेंगे, तो वे उन्हीं कानूनों को अमली जामा पहनाते हैं,जिसमें उनका फायदा हो।आज संसद में बैठे, हमारे प्रतिनिधि घर बैठे ही चुनाव जीत जाते हैं।
अगर, सिस्टम में बदलाव लाना है, तो सही प्रतिनिधि को चुनना ही होगा, तभी बदलाव हो सकता है।जरूरत है कि राजनीति में आने के लिए भी शिक्षण संस्थान हो, पात्रता तय हो, चूंकि यही लोग देश की दिशा और दशा तय करेंगे।हम सब को सोचकर कितना अटपटा लगता है कि अंगूठे छाप के नीचे विद्वान और शिक्षित आईएएस अधिकारी होते हैं।जबकि इसका विपरीत होना चाहिए।इससे बड़ी दुविधा और क्या हो सकता कि जो कभी रक्षा मंत्री था, वो गृह मंत्री बन जाता, जो कभी कृषि मंत्री था, वो वित्त मंत्री बन जाता है।सही लोगों को, सही मंत्रालय देना चाहिए, जिससे कि काम में निरंतरता और आसानी बनी रहे।अनुभवी और उसी विभाग से जुड़े लोगों को अगर मंत्रालय दिया जाएगा, तो काम में कुशलता और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।जब सब कुछ बदल रहा तो इसमें भी जरूरत है कि बदलाव किया जाए।



Alright, India needs a talented and skillful minister. जब एक आईएएस की ट्रेनिंग हो सकती है तो एक मिनिस्टर की क्यों नहीं?
ReplyDeleteYour words are true and exact...💮
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